UPCL की कार्यप्रणाली में होगा सुधार: बिजली मांग के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश

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देहरादून। उत्तराखंड के उपभोक्ताओं को अब गर्मियों और त्योहारों के सीजन में होने वाली अघोषित बिजली कटौती से बड़ी राहत मिलने वाली है। प्रदेश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। आयोग ने 'संसाधन पर्याप्तता ढांचा (रिसोर्स एडिक्वेसी फ्रेमवर्क) नियमावली 2026' का मसौदा जारी कर दिया है, जिसके तहत अगले 10 वर्षों के लिए बिजली की मांग और आपूर्ति का सटीक खाका तैयार किया जाएगा। इस नई नियमावली की सबसे बड़ी विशेषता बिजली की मांग का सटीक अनुमान लगाना है। अब तक बिजली की मांग का आकलन पारंपरिक तरीकों से होता था, लेकिन अब आयोग अत्याधुनिक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डेटा एनालिटिक्स का सहारा लेगा। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि आने वाले 10 वर्षों में किस क्षेत्र में, किस समय कितनी बिजली की जरूरत होगी। इससे न केवल मांग का सटीक पता चलेगा, बल्कि बिजली की बर्बादी भी रुकेगी।

अक्सर देखा जाता है कि पीक सीजन (गर्मियों) में मांग बढ़ते ही सिस्टम चरमरा जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए आयोग ने प्लानिंग रिजर्व मार्जिन का प्रावधान किया है। इसका अर्थ यह है कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को अपनी अनुमानित अधिकतम मांग से कुछ प्रतिशत अधिक बिजली का इंतजाम 'बैकअप' के तौर पर पहले से रखना होगा। इससे अचानक मांग बढ़ने पर भी उपभोक्ताओं को बिना किसी कटौती के निर्बाध बिजली मिल सकेगी। बाजार में बिजली की कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव का बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर न पड़े, इसके लिए आयोग ने कड़े मानक तय किए हैं। यूपीसीएल को अपनी कुल जरूरत का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक अनुबंधों के जरिए सुरक्षित करना होगा। शेष बिजली ही ओपन मार्केट से ली जा सकेगी। साथ ही, पनबिजली के साथ-साथ सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच बेहतर संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। नियामक आयोग ने इस मसौदे को सार्वजनिक कर दिया है। राज्य का कोई भी नागरिक, विशेषज्ञ या संस्थान इस ड्राफ्ट पर 12 जून 2026 तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकता है। इन सुझावों पर विचार करने के बाद ही नियमावली को अंतिम रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन 'ऊर्जा प्रदेश' को साकार करने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना के लागू होने से न केवल उद्योगों को सुचारू बिजली मिलेगी, बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं को भी 'नो ट्रिपिंग' जोन का अनुभव मिलेगा।