उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना खासा अहम होने जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 7 मार्च को हरिद्वार दौरे पर पहुंच रहे हैं। आधिकारिक तौर पर यह दौरा सहकारिता सम्मेलन और वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले की तैयारियों की समीक्षा से जुड़ा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। देहरादून स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शाह के दौरे की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 2027 के अर्धकुंभ के लिए 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धनराशि आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने में सहायक होगी और राज्य सरकार अर्धकुंभ को “दिव्य और भव्य” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
शाह हरिद्वार के बैरागी कैंप मैदान में तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। दौरे से पहले मुख्यमंत्री धामी ने उच्चस्तरीय बैठक कर सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। राजनीतिक दृष्टि से हरिद्वार जिला बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हरिद्वार ग्रामीण, खानपुर, मंगलौर और पिरान कलियर जैसी सीटों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में धार्मिक आयोजन और विकास परियोजनाओं के सहारे यहां जनाधार मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संकेत दिए हैं कि शाह की अध्यक्षता में प्रदेश नेतृत्व की बैठक में 2027 चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होगी। वहीं, कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक आयोजन करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यदि विकास की ठोस योजनाएं सामने आती हैं तो स्वागत है, लेकिन धार्मिक मंचों का राजनीतिक उपयोग उचित नहीं है। गौरतलब है कि 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे की भी चर्चा है। ऐसे में शाह और मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रमों को धामी सरकार के चार साल पूरे होने के साथ-साथ आगामी चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है। हरिद्वार से उठने वाली यह सियासी गूंज आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।