Feb 25, 2026

11700 बीएलओ के तबादलों पर पूरी तरह रोक, निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया ने बदला तबादलों का पूरा स्वरूप

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देहरादून। उत्तराखंड में एक अप्रैल से शुरू होने जा रहे वार्षिक तबादला सीजन पर इस बार जनगणना और निर्वाचन कार्यों का साया पड़ गया है। प्रदेश के करीब 40 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के तबादले शुरुआती दिनों में नहीं हो सकेंगे। गृह मंत्रालय ने जनगणना कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए इस अवधि में कर्मचारियों को इधर से उधर न करने का औपचारिक अनुरोध किया है। इसके साथ ही अप्रैल माह में चुनाव आयोग का विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम भी शुरू होने जा रहा है, जिसने तबादला प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।

उत्तराखंड में आगामी जनगणना दो चरणों में संपन्न होनी है। पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई के बीच मकानों का सूचीकरण किया जाएगा, जिसके लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित 'स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी' की बैठक में स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय ने जनगणना के दोनों चरणों के दौरान फील्ड में तैनात अमले का तबादला न करने का सुझाव दिया है। अति दुर्गम और हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का कार्य इस वर्ष सितंबर में होगा, जबकि शेष क्षेत्रों में अगले साल फरवरी में मुख्य जनगणना शुरू की जाएगी। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में लगे हजारों कर्मचारियों को वर्तमान तैनाती स्थल पर ही बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। तबादलों पर रोक का दूसरा बड़ा कारण निर्वाचन आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम है। आयोग ने इसके लिए अप्रैल माह का समय तय किया है। इस प्रक्रिया में प्रदेश के करीब 11,700 बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) सहित 12 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। एसआईआर की यह प्रक्रिया लगभग एक माह तक चलेगी। नियमानुसार, निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण कार्य में लगे कर्मियों का इस दौरान तबादला नहीं किया जा सकता है। सरकार के इस फैसले से उन कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है जो इस तबादला सीजन में अपनी पसंद की जगह जाने या अनिवार्य तबादलों की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 40 हजार कर्मचारियों को तबादला प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है, तो इस वर्ष तबादला सूची काफी छोटी हो जाएगी। हालांकि, मुख्य सचिव के स्तर से अभी इन तिथियों और तबादलों के स्वरूप को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है, लेकिन गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि इस बार तबादलों की राह आसान नहीं होगी।