Apr 02, 2026

यूरोप के अंतरराष्ट्रीय समूहों द्वारा वसंत पर्वतारोहण अभियानों को रद्द करने के बाद उत्तरकाशी में होटल अधिभोग में भारी गिरावट आई

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उत्तरकाशी। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच गत एक माह से चल रहे तनाव और संघर्ष का असर अब उत्तराखंड के पर्वतारोहण और ट्रेकिंग व्यवसाय पर साफ दिखाई देने लगा है। उत्तरकाशी जिले में हर वर्ष मार्च माह में विदेशी पर्यटकों की सबसे अधिक बुकिंग आती थी, लेकिन इस वर्ष अभी तक कोई नई बुकिंग नहीं आई है। साथ ही पहले से की गई पुरानी बुकिंग्स को भी विदेशी ग्रुपों ने होल्ड पर डाल दिया है। गढ़वाल माउंटेनियरिंग ट्रेकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने बताया कि मार्च तक विदेशी पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स की सबसे ज्यादा बुकिंग आती थी। इनमें इजराइल, अमेरिका, ब्रिटेन (यूके) और अन्य यूरोपीय देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे। लेकिन इस बार इन देशों से न तो कोई नई बुकिंग आई है और न ही पुरानी बुकिंग को आगे बढ़ाया गया है। कई ग्रुपों ने स्पष्ट रूप से अपनी बुकिंग रद्द या स्थगित कर दी है।

उत्तरकाशी में हर साल औसतन 10 हजार से अधिक विदेशी पर्वतारोही और ट्रेकिंग प्रेमी पहुंचते हैं। इनके आने के बाद ही देश के विभिन्न राज्यों से भी बड़ी संख्या में भारतीय पर्वतारोही और ट्रेकर्स आते हैं। विदेशी पर्यटकों की अनुपस्थिति का सीधा असर स्थानीय होटल, गेस्ट हाउस, ट्रेकिंग एजेंसियों, गाइडों, पोर्टरों, टैक्सी ऑपरेटरों और उपकरण किराए पर देने वाले कारोबारियों पर पड़ रहा है। जयेंद्र राणा ने कहा, “विदेशी पर्यटक न आने से सिर्फ पर्वतारोहण और ट्रेकिंग का व्यवसाय ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यटन इकोसिस्टम पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन ने 1 अप्रैल से पर्वतारोहण गतिविधियां शुरू करने का आश्वासन दिया था, जिससे हमें इस वर्ष अच्छे कारोबार की उम्मीद थी। लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध के खतरे ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ट्रेकिंग व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि विदेशी ग्रुप आमतौर पर मार्च-अप्रैल में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, गोमुख, तपोवन, हर की दून, रूपिन स्वर्ग जैसे लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट्स पर आते हैं। इनके रद्द होने से हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग अब वैकल्पिक रणनीति पर विचार कर रहा है। घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विशेष पैकेज और प्रचार-प्रसार की योजना बनाई जा रही है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने का भरोसा दिलाकर विदेशी पर्यटकों को फिर से आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा। कारोबारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए कुछ राहत पैकेज या सहायता प्रदान की जाए, ताकि यह महत्वपूर्ण पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह से ठप न हो जाए।